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Yeh Mahan Desh

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shared Jan 10 in Poem by kalpana
मेरे देश में मेला है
देश मेरा निराला है ।

जात जात के लोग है
लोगों का झमेला है ।

सब की हां- ना होती है
जन तन्त्र इसका नारा है ।

सब को गले लगाये है
ये बड़ा दिलवाला है ।

एक सौ छियानवे देशों का
यहीं बस एक राजा है ।

मेल मिलाप धुप चाव सा
चले इसकी उधारता है ।

दुश्मनो का भी दोस्त है
ये इसकी महानता है ।

प्रेम ही इसका धनसुख है
प्रेम से ही जग जीता है ।

© Kalpana's Imagination
commented Jan 17 by gurjyot_singh
superb poem...
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