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खुली मेरी आँखे कुछ होश न था,
लड़की होना मेरा दोष न था,
खुशकिस्मत थी मै जो अपनों ने अपना लिया,
एक लड़की से ज्यादा अपनी बेटी बना लिया ।

पता था माँ को ये मेरी दुनिया नहीं,
मेरे लिए सारी खुशियां नहीं,
दिया मुझको जीवन ,
दिया मुझको कारण ,
लड़को जैसा ही किया मेरा पालन,
लेकिन पंखो को मेरे दुनिया ने काट दिया,
तब भी मुझे माँ ने संभाल लिया,
माँ होने की कीमत उसने भी अदा किया,
एक लड़की से ज्यादा अपनी बेटी बना लिया ।

जवान हुई तो माँ को था डर,
शायद पता था उसे की घर में ही हैं राक्षस,
हज़ार पहरे थे,
थे हज़ार ताने,
लेकिन मुझे भरनी थी उड़ाने,
मै थी नीचे आसमान था दूर,
जीत के लाना था मुझे चाँद का नूर,
तोड़ सारे पहरे तानो को हिम्मत बनाया,
अंजान दुनिया में अपना कदम बढ़ाया,
मुश्किले थी लांखो हर मोड़ पे माँ ने साथ दिया,
एक लड़की से ज्यादा अपनी बेटी बना लिया ।

वक़्त गुज़रने में वक़्त न लगा,
बढ़ता रहा मेरे जूनून का सिलसिला,
हारी बहुत,बहुत सी ठोकरें खाई,
धीरे-धीरे अपनी मंज़िले पाई,
किस ने कहा आसमान के आगे कोई रस्ता नहीं,
फिर न कहना 'ये लड़कियों के बस का नहीं ' ,
समुद्र के गहरे नीर तक,
आसमान का सीना चीर कर,
हमने ही सब कब्जाया है,
सब अपने नाम लिखाया है,
घर हो या हो युद्ध का मैदान,
कर देंगे हम हर बलिदान,
माँ,बेटी,बीवी या अफ़सर,
पूरे करते हैं सारे फ़र्ज़,
बस एक मौका, साथ चाहिए,
थोडा हौसला, प्यार चाहिए,
नमन है हर एक नारी को,
हर दुर्गा को हर काली को,
जिसने हमको अपनाया है,
हमे 'हमारा' महसूस कराया है,
हर सुख-दुःख को अपने दिल में समां लिया,
धन्यवाद दाता !
एक लड़की से ज्यादा अपनी बेटी बना लिया ।

                                                        - रजनी रावत
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Superb......
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Thank you so much ...
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wow......its a fabulous piece dear

Welcome to YoAlfaaz :)
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Thank you priya...
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Well written!!!
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Thank you!!!
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Excellent. ..and congrats!
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Thank you mam and congrats to you too. :)
commented by
beautiful poem and congratulations...
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Thank you Sir

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