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हूँ फसा भंवर मे जिंदगी के, और कोई कहानी क्या कोई अफ़साना क्या

मूँह दिखा पाउन तुझे किसी रोज़, और किसी को मुझे कुछ दिखना क्या

बसा हूँ तेरे शहर मे बरसों से, और पूछते हो मेरा ठिकाना क्या

देख पाउन तुझे रोज़ एक बार, है यही तममन्ना, और कोई बहाना क्या

दिल साफ ना हो तो तुझे पाना क्या और भूल जाना क्या

निगाहों से पिला दे, शराब लाए नशा मुझे, वैसा मै दीवाना क्या

तलब नही समंदर की मुझे बस तू रहे जेहन मे मेरे पल पल

और ना कोई फरमाइश, ना ख्वाइश है, ऐसा भी तेरा मुझे आजमाना क्या

नज़र चुरा के लेते हो जयका, तस्साउरर का मेरे, ख़याल मे रहता है मेरे

तारूफ्फ दूँ हाल-ए-दिल का तुझे फिर, और किसी को मुझे कुछ बताना क्या

क़ाज़ी बना बैठा हू तुझे ज़मीर का अपने, और क्या बत्लाउन तुझे अब मै

लुत्फ़ भी उठाता हूँ, ताबीर को अपनी अब, किसी से छुपाना क्या दिखाना क्या

वादा कर जमाने ने मुजरिम कहा मुझे कभी तो नही भुलाएगा मुझे

तकदीर से मिला है तू, ग़लती हुई मुझसे गर, तेरा उसे दिल्को लगाना क्या

दर्द और दवा का सा वास्ता मेरा तुझसे, और तुझे समझाना क्या

बता दिया जेहन मे जो था तुझे, अब और कुछ पूछेगा जमाना क्या

भा गया मूह फेरके मुस्कुराना तेरा, अब मेरा जीना क्या मर्जाना क्या

इश्क़ है बरकरार आज भी, और दिल को लुभाना क्या, ज़माने को बताना क्या

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wow! loved it.....superb yaar
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Thank you so so much Priya.... :) there's one more waiting to be completed in the kitty... will post soon again :)
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Great....I am waiting :D
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thanks for the honor... i feel like a shayar already :D

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