Welcome to YoAlfaaz, the best platform for writers to Share their write-ups. Get maximum exposure, interact with top writers, gain and share knowledge and create your online presence as a writer. You can start by Registering here. For any query visist F.A.Q.

काश ! ऐसा होता .....

+1 vote
14 views
shared Dec 26, 2016 in Short Story by Amita Gupta Magotra
लघु कथा

प्रेरणा एक रिपोर्टर थी। सिर्फ रोज़ी रोटी के लिए वो इस व्यवसाय में नहीं आई थी। समाज की कुरीतियों और ऐसी  ही कई कड़वी सच्चाइयों  से अनभिज्ञ लोगों को असली ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा समझाने ,आईना दिखाने के लिए ही वो ये कार्य करती थी। इसमें साथ देते थे उसके कमिशनर अंकल। आज सुबह सुबह भी तो उसको अंकल का ही फ़ोन आया था। एक कैदी से मुलाकात के लिए। जो कि आज रिहा हो रहा था। जैसे ही प्रेरणा अंकल के ऑफिस पहुंची,अंकल ने बिना वक़्त गंवाए सिपाही को भेज कर उस कैदी को बुला भेजा। अधेड़ सी उम्र का एक आदमी, जो कभी साफ रंग रूप की शख्सियत का मालिक रहा होगा,कद काठी कुछ खास नहीं थी उसकी , कमरे में प्रवेश किया। अंकल उन दोनों को बातें करने को कह कर खुद वहां से बाहर चले गए। अब कमरे में थे प्रेरणा और वो कैदी। प्रेरणा को लगा "वो " उससे बात करने में सहज नहीं हो पा रहा। इसीलिए अंकल से आज्ञा लेकर प्रेरणा उसे लेकर जेल के बाग़ में चली गई। ऐसे खिले हुए माहौल में आकर कैदी का चेहरा भी कुछ खिला अर्ध खिला सा लगा। फिर उसने अपनी कहानी सुनानी शुरू की।
मैडम जी,मैं भी एक हँसते खेलते परिवार का हंसमुख लड़का था। मेरा गाँव धरती का स्वर्ग कहलाये जाने वाली जगह कश्मीर में था।हम सब हंसी ख़ुशी वहां अपनी ज़िन्दगी गुजार रहे थे। पर मेरा परिवार दुश्मनों की गोलियों का निशाना बन बैठा और बचा सिर्फ मैं। मैं भी साथ ही मारा जाता तो ठीक था।पन्द्र सोलह साल का ही तो था तब। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना है। कुछ भटके हुए नौजवान थे जो पत्थर बाजी करते थे वहां।पहले भी मैं अपने माँ बाप से पूछता था इस सब के बारे में तो वो मुझे कुछ न बताते थे। बस इतना ही कहते थे कि  इस तरफ ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। पर उनके बाद मुझे मजबूरन ध्यान देना ही पड़ा। न कुछ काम था मेरे पास करने को और न ही कोई और जरिया पेट भरने को। बस उन्हीं लड़कों के साथ निकल लिया। सोचा पत्थर फैंकने की सिर्फ एक्टिंग ही करूँगा ,किसी को नुक्सान नहीं पहुँचाऊँगा। पर मैडम जी, वो पानी कब तक साफ़ रह पाता है जिसमें हर तरफ से कूड़ा करकट और विषैले पदार्थ कोई मिला दे। उनके साथ  काम करते करते,पुलिस से बचते बचते कब यहाँ तक पहुंच गया कुछ पता ही न चला। ये कमिशनर बाबू मिले तो इन्होंने ज़िन्दगी को फिर से जीना सिखाया , जैसा कि मेरे माँ बाप मुझे सीखाते थे। अगर कहीं बाबू जी पहले मिल जाते तो आज मैं इस अवस्था में यहाँ न होता। काश ! ऐसा होता .....       

अमिता  गुप्ता मगोत्रा

Related posts

+2 votes
0 replies 51 views
+4 votes
0 replies 15 views
+2 votes
0 replies 15 views
+3 votes
0 replies 13 views
+4 votes
0 replies 22 views
+4 votes
0 replies 25 views
+3 votes
0 replies 20 views
Connect with us:
...