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इश्क़ में इश्क़ से इश्क़ लिख रहा हूँ
ये ख़त अज़नबी के पतें लिख रहा हूँ

तेरी अनकही बातें नजरों की वो मुलाकातें
ख़ुद की लफ़्ज़ों में वो तेरी ख़ामोशी लिख रहा हूँ

तेरा छत पर वो  आना जाना खिड़कियों से देख शर्माना
ख़ुद की नज़र से तेरी शरारतें लिख रहा हूँ

छुप-छुप कर तेरा देखना देख अनदेखा कर मुस्कुराना
ख़ुद की होठों से तेरी वो मुस्कराहट लिख रहा हूँ

उँगलियों से जमीं पे लिखना लिखकर फिर मिटकाना
तेरी उन अधुरें शब्दों की कहानी लिख रहा हूँ

इश्क़ में इश्क़ से इश्क़ लिख रहा हूँ
ये ख़त अज़नबी के पतें लिख रहा हूँ ।
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ho....sooo sweettt
:):):)
just amazing....
impressive
commented by
Thanks with love...
commented by
amazing write-up...

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