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मेरे पिता 
कभी हँसाते  है कभी मनाते है 
मेरे पापा ही तो मुझे रोज नींद से जगाते है 
मेरी मनमर्ज़ियों की पूर्ति है मेरे पिता 
कभी मेरी गलतियों को अनसुना कर देते है 
कभी शांत तो कभी सख्त है मेरे पिता
वो पिता ही है जिनसे हमारी पहचान है 
जीवन का असली महत्व है मेरे पिता 
सारे गम वो अकेले ही पीते  है 
सार्थक का असली अर्थ है मेरे पिता 
खामोश रह कर भी सब कुछ कह देते  है 
सच कहु तो मेरा विश्वास है मेरे पिता 
हमारे ख्वाबो के लिए दिन रात लगा देते है 
आसमान जैसा फैला अभिमान है मेरे पिता 
कभी अल्फाज़ो से जी भर जाता है तो कभी 
जो शब्दो में सिमट न सके ऐसा सवाभिमान हे मेरे पिता 
दिन में उजाला और रात में चांदनी जैसे शांत है 
हर मौसम की पहचान से हे मेरे पिता 
शब्द बहुत है शब्दो की कमी नहीं है 
बस चंद अहसासो के साथ यही कहना है मुझे 
सच कहु तो मेरा अनुभव ,अनुशासन, आत्मसात्कर है मेरे पिता !!

लेखक - Own Written
मोनिका चौहान मथुरा 

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Nice one Monika :)
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what an amazing piece....well written

Welcome to YoAlfaaz :)
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thanks a lot for your appreciation..............happy fathers day
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thanks Deepika ji and Priya ji
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बहुत उम्दा मोनिका जी
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thanks a lot praveen ji
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Your wlcm Monika ji
commented by
Very well written and congratulations on winning... :)
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thanks gurjot ji

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