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कोई दाग़ ना मिले, जो गिरेबान में झांकते हैं
दो हाथ जोड रब से दुआ ये मांगते हैं
मग़र तेरे इश्क ने ये रोग़ लगा दिया
ना रात में सोते हैं, ना दिन में जागते हैं

मुहब्बत तो दी नहीं
और ठुकरा दिया ये कहके
मेरी नफ़रत के भी लायक नही तुम
जो हम नफ़रत ही मांगते हैं

ग़म से मुहब्बत इस कदर
के दामन ही भर लिया
भूली भटकी कहीं मिल जाये खुशी
तो हम खुशियों से भागते हैं

क्यूं इतरा रहे हैं वो हुस्न पे
जो हमने उन्हे देखा
कोई बतलाये उन्हे जाकर "अनिल"
आज कल हम सबको ताकते हैं

और इस कदर ख़फा हुआ है
मुझसे मेरा ख़ुदा
मौत भी नही देता मुझे
ग़र मौत ही मांगते हैं
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waah waah ..
very nice Anil.. :)
commented by
Thanks Brother
commented by
beautifully written...
commented by
Thanks Paa Ji

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