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विलुप्त क्रांति

सिर्फ नस्लें ही
विलुप्त नही होती,
कई बार विलुप्त हो जाती है
क्रांतिया भी ,
जब नस्लें विलुप्त हो जाती है
तब शरीर मिट्टी में दब कर कहीं
छोड़ जाते है निशान कोई ,
जीवाश्म बन,
और जब
और क्रांतियां दफन हो जाती है
मन के गहराते नैराश्य में ,
वे छोड़ जाते है,
दूर तक रिक्तता और अवसाद
और अट्टाहास करते जुल्म,
लेकिन एक नस्ल का स्थान लेने
ज्यूं नऐ जीव आ जाते है
क्रांतियां भी फिर आऐगीं
नये प्रतीको में ढल कर
और दावानल सी लील लेगीं
तमाम अन्याय के जंगलो को ,
बस एक चिंगारी पैदा होने की जरूरत है.

© हरदीप सबरवाल.
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superb lines...
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Thank you so much Gurjyot ji
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superb Hardeep Sir :)
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बहुत खूब यकीनन
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It's amazing
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Thank you so much every one
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