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मौसम का मिजाज़ अबके कुछ बेहतर है

मेज़बान है रुत रंगों का इंतिखाब बेहतर है

शभनम का ताज पत्तियों पे नूर-ऐ-नज़र है

खिल रहे हैं फूल गुलों पे शबाब बेहतर है

अब्र और आफ़ताब के बीच रक़ाबत ठीक है

आसमां बरसा एक बार तो आब बेहतर है

भीगा शहर तो यादें ताज़ा हो गयीं

मुस्कुरा के मिला तू तो बातों का सैलाब बेहतर है

चल निकलें बाहर फ़िज़ा की दाद दें अबके

ख्याल तेरा ये ना याब बेहतर है

नींद नही आँखों में तो चल आसमां को ताके

स्याह रात में दिखे जो माहताब बेहतर है

जीस्त की ताब न घेर ले फिर कल मुझको

दुआ है आज ही दे मुझे जवाब बेहतर है

हिज्र में तड़पता था मै कबसे

मिला जो अबके तेरा आदाब बेहतर है

बेसलीक़ा बात करे क्यों रक़ीब तू मुझसे

न दूंगा जवाब तेरा ीताब बेहतर है

हुस्न वाले नज़ाक़त से पेश आएं हमसे

कैसे हो फिर इख्तियार अजाब बेहतर है

दिल्लि तमन्ना कुछ और बताऊँ कुछ और मै

ऐसा मेरा बरताव है तो इज्तिराब बेहतर है  

दीमक भरी अलमारी पे नयी पोषिष हो  

संगेमरमर के जैसा तेरा ख्वाब बेहतर है

लाइलाज मर्ज का गुलाम था मै कबसे पर

मुस्कुरा के चला हु अबके तो सवाब बेहतर है

जल्दी नहीं तस्सल्ली है मुझे भी आराम है

तख्तोताज का क्या करना शायर का खिताब बेहतर है

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nice post
it was good a good vocabulary you have
sometimes simple words are much better and easy to understand but not good in rhyme
so words are of utmost importance
keep going
commented by
Thank you Ravi sahab for reflecting on my piece.
commented by
Credit goes to your work

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